शादी के लिए सही जीवनसाथी का चयन कैसे करें? जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति
शादी के लिए सही जीवनसाथी का चयन कैसे करें? जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति
शादी केवल दो व्यक्तियों का ही नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी मिलन होता है। सही जीवनसाथी का चुनाव जीवन के सुख-दुख में संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। महान विद्वान और राजनीति के मर्मज्ञ आचार्य चाणक्य ने भी अपने ग्रंथ "चाणक्य नीति" में जीवनसाथी चुनने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। आइए जानते हैं कि चाणक्य नीति के अनुसार सही जीवनसाथी का चयन कैसे करें।
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1. अच्छे कुल और संस्कारों को दें प्राथमिकता
चाणक्य नीति के अनुसार, जिस परिवार में व्यक्ति जन्म लेता है, उसके संस्कार और परवरिश उसके व्यवहार और सोच को प्रभावित करते हैं। यदि जीवनसाथी अच्छे कुल का हो, तो उसके आचरण और विचार भी उत्तम होंगे। यह भविष्य में एक सुखी दांपत्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है।
चाणक्य कहते हैं:
*"कुलं पश्य प्रतिव्यक्तिं विद्यां पश्य न चापरम्।" *
अर्थात, विवाह से पहले व्यक्ति के कुल और उसकी विद्या (शिक्षा) को अवश्य देखना चाहिए।
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2. चरित्र को बनाएं प्राथमिक आधार
चाणक्य के अनुसार, विवाह के लिए केवल रूप-रंग और धन को ही महत्व नहीं देना चाहिए, बल्कि सबसे पहले व्यक्ति के चरित्र और नैतिकता को देखना चाहिए। एक अच्छे चरित्र वाला जीवनसाथी जीवन में हर परिस्थिति में साथ निभाएगा और परिवार को सम्मान देगा।
चाणक्य कहते हैं:
"सुशीलं पुरूषं स्त्री वा न प्रष्टव्या कुलेन वा।"
अर्थात, चरित्रवान व्यक्ति के कुल को लेकर प्रश्न नहीं उठाए जाने चाहिए, क्योंकि उसका अच्छा स्वभाव ही सबसे बड़ी विशेषता है।
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3. समान विचारधारा और समझ होनी चाहिए
चाणक्य नीति के अनुसार, पति-पत्नी के विचारों में अधिक असमानता नहीं होनी चाहिए। यदि दोनों की सोच, जीवन के प्रति दृष्टिकोण और मूल्यों में समानता होगी, तो विवाह सफल रहेगा। समान विचारधारा होने से परस्पर सम्मान और सामंजस्य बना रहता है।
चाणक्य कहते हैं:
"समं शीलं समं वयः समं विद्या समं कुलम्।
एतन्मिलित्वा जायन्ते ततो विवाह उच्यते।।"
अर्थात, जब दो व्यक्ति समान गुण, शिक्षा, विचार और संस्कार रखते हैं, तभी विवाह सफल होता है।
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4. आर्थिक स्थिति और स्वावलंबन को भी नज़रअंदाज न करें
चाणक्य मानते थे कि जीवन में धन का महत्व होता है। हालांकि, धन ही सबकुछ नहीं होता, लेकिन आर्थिक स्थिरता और स्वावलंबन किसी भी सफल वैवाहिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। पति-पत्नी दोनों में से कोई भी पूरी तरह से दूसरे पर निर्भर न रहे, बल्कि आत्मनिर्भर हो।
चाणक्य कहते हैं:
"धनेषु जीवितं लोके निःधनः कः सुखी भवेत्।"
अर्थात, धन के बिना जीवन कठिन हो जाता है और आर्थिक समस्या वैवाहिक जीवन में तनाव का कारण बन सकती है।
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5. संयम और धैर्य रखने वाला जीवनसाथी चुने
चाणक्य के अनुसार, जीवन में हर परिस्थिति समान नहीं होती। कभी सुख तो कभी दुख आता है। ऐसे में यदि जीवनसाथी धैर्यवान और संयमी होगा, तो वह मुश्किल समय में भी रिश्ते को संभाल सकेगा।
चाणक्य कहते हैं:
"न तेन तल्पे सुखमाप्नुवन्ति यस्याग्रे कण्टकसंस्थितानि।"
अर्थात, जो व्यक्ति धैर्य और संयम नहीं रखता, वह जीवन में सच्चा सुख प्राप्त नहीं कर सकता।
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6. परस्पर सम्मान और विश्वास सबसे जरूरी
चाणक्य के अनुसार, जिस रिश्ते में परस्पर सम्मान और विश्वास न हो, वह अधिक समय तक नहीं टिकता। विवाह में पति-पत्नी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और रिश्ते में विश्वास बनाए रखना चाहिए।
चाणक्य कहते हैं:
"श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।"
अर्थात, जहां श्रद्धा (सम्मान) होती है, वहीं सच्चा ज्ञान और संबंध मजबूत होते हैं।
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7. मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर दें ध्यान
चाणक्य नीति में कहा गया है कि एक स्वस्थ व्यक्ति ही अपने परिवार का सही तरह से ध्यान रख सकता है। इसलिए जीवनसाथी का मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी है।
चाणक्य कहते हैं:
"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।"
अर्थात, शरीर पहला साधन है, जिसके माध्यम से जीवन के सभी कर्तव्यों का पालन किया जाता है।
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निष्कर्ष
चाणक्य नीति के अनुसार, शादी के लिए सही जीवनसाथी चुनने से पहले व्यक्ति के कुल, चरित्र, विचारधारा, आर्थिक स्थिति, धैर्य, सम्मान और विश्वास को ध्यान में रखना चाहिए। विवाह केवल प्रेम का विषय नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक जिम्मेदारी और समर्पण की नींव पर टिका होता है। यदि इन सभी बातों का ध्यान रखा जाए, तो एक सुखी और सफल वैवाहिक जीवन संभव है।
अतः, चाणक्य की नीतियों का पालन करें और अपने जीवनसाथी का चयन बुद्धिमानी से करें, ताकि आपका दांपत्य जीवन सुखमय और समृद्ध हो सके।
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